ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है, और इसका सीधा असर दुनियाभर के क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) बाजार पर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में लगातार हो रहे हमलों के बाद तेल की कीमतें बीते एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। आइए जानते हैं आज की ताजा अपडेट और इसका भारत सहित पूरी दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या हो रहा है ईरान-अमेरिका के बीच?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। अमेरिकी सेना (US CENTCOM) ने ईरान के कई ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं, जिनका मकसद ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है जिससे वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में व्यापारिक जहाजों पर हमला कर सके। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इस अहम जलमार्ग से गुजर रहे कुछ तेल टैंकरों को निशाना बनाया है, जिसमें कुछ जहाज क्षतिग्रस्त हुए हैं।
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर दोबारा नौसैनिक नाकाबंदी (blockade) लागू कर दी है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने जहाजों पर प्रस्तावित 20% "ट्रांजिट फीस" वाले विवादित प्रस्ताव को वापस ले लिया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में कड़ी आलोचना हो रही थी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इतना अहम क्यों है?
दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरती है। जब से संघर्ष दोबारा भड़का है, इस रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है — सामान्य दिनों में जहां रोजाना करीब 130 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर बेहद कम रह गई है। शिपिंग कंपनियां जोखिम के डर से इस रूट से बचने लगी हैं, जिससे सप्लाई पर सीधा दबाव बढ़ रहा है।
आज क्रूड ऑयल की कीमत क्या है?
- ब्रेंट क्रूड (अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क): करीब 85-87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जो बीते एक महीने का उच्चतम स्तर है।
- WTI क्रूड (अमेरिकी बेंचमार्क): लगभग 79-81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
- यह गौर करने वाली बात है कि युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 15-19% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
ध्यान दें: हालांकि मौजूदा कीमतें युद्ध के पहले चरण (फरवरी-मार्च) में देखे गए करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से अभी भी काफी नीचे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से भारत पर सीधा असर पड़ता है। इस हफ्ते होर्मुज़ जलमार्ग से गुजर रहे दो टैंकरों पर हुए हमले को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और नौवहन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। भारत पहले भी इस क्षेत्र में हुई घटनाओं से प्रभावित रहा है, जब पिछले संघर्ष के दौरान एक हमले में कुछ भारतीय नाविकों की जान गई थी।
अगर क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो इसका असर आने वाले समय में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई दर और आयात बिल पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से तुरंत संघर्षविराम की अपील की है, यह चेतावनी देते हुए कि लड़ाई और बढ़ने पर पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर मानवीय और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास अभी भी अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) से सप्लाई को संभालने की कुछ गुंजाइश बची है, लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो यह बफर जल्द खत्म हो सकता है, जिससे कीमतों में और तेज उछाल का खतरा बना रहेगा।
निष्कर्ष
ईरान-अमेरिका संघर्ष एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा जोखिम बनकर उभरा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जारी तनाव से आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब दोनों पर पड़ सकता है। स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. ईरान-अमेरिका तनाव की मौजूदा वजह क्या है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य टकराव शुरू हो गया है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं।
Q2. क्रूड ऑयल की कीमत आज कितनी है?
ब्रेंट क्रूड करीब 85-87 डॉलर और WTI क्रूड करीब 79-81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
Q3. क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है, हालांकि यह सरकार की नीतियों पर भी निर्भर करेगा।
Q4. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है।

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