Tool

https://www.taajaupdate.in/p/step-up-sip-calculator-2026.html

पोस्ट ऑफिस MIS: 7.4% ब्याज पर ₹9,250 तक हर महीने, पूरा हिसाब

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम: 7.4% ब्याज पर हर महीने ₹9,250 तक की कमाई कैसे होगी?

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) में अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दर 7.4% सालाना ही रहेगी। वित्त मंत्रालय ने 30 सितंबर को छोटी बचत योजनाओं की दरें लगातार दसवीं तिमाही में बिना बदलाव रखीं।

इसी दर पर ₹9,250 की मासिक कमाई का दावा बनता है। यह रकम तब मिलेगी जब तीन लोग मिलकर संयुक्त खाते में ₹15 लाख जमा करें। अकेले खाते में ₹9 लाख की सीमा पर महीने की कमाई ₹5,550 बैठती है।

यह भी पढ़ें: PM सुरक्षा बीमा योजना: सिर्फ ₹20 सालाना में मिलेगा ₹2 लाख का एक्सीडेंट कवर

क्या हुआ?

सरकार हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं की दरों की समीक्षा करती है। 30 सितंबर 2026 की समीक्षा में अक्टूबर-दिसंबर 2026 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया। डाक विभाग ने उसी दिन SB Order No. 12/2026 जारी कर बताया कि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक पिछली तिमाही की दरें लागू रहेंगी।

इसलिए इस तिमाही में नया POMIS खाता खोलने वालों को 7.4% मिलेगा।

पूरी जानकारी

बिंदुजानकारी
ब्याज दर7.4% सालाना (अक्टूबर-दिसंबर 2026)
ब्याज का भुगतानहर महीने
अवधि5 साल
न्यूनतम जमा₹1,000 और उसके गुणक
अधिकतम जमा (एकल खाता)₹9 लाख
अधिकतम जमा (संयुक्त खाता)₹15 लाख

तुलना के लिए, PPF पर 7.1%, NSC पर 7.7% और सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम पर 8.2% सालाना ब्याज है।

इसका असर किस पर पड़ेगा?

  • रिटायर्ड लोग और बुजुर्ग: जिन्हें हर महीने तय आमदनी चाहिए, उनके लिए यह स्थिर विकल्प है। 60 साल से ऊपर के लोग SCSS से भी तुलना कर सकते हैं, जिसमें ब्याज तिमाही मिलता है।
  • कम जोखिम चाहने वाले निवेशक: यह सरकारी योजना है, इसलिए पूंजी सुरक्षित मानी जाती है।
  • नया निवेश करने वाले: इस तिमाही में खाता खोलने पर 7.4% मिलेगा। दरों की समीक्षा हर तिमाही होती है, इसलिए आगे की तिमाहियों में नए खातों की दर बदल सकती है।

उदाहरण/हिसाब

सूत्र: मासिक ब्याज = जमा राशि × 7.4% ÷ 12

जमा राशिमासिक ब्याजसालाना ब्याज
₹1,00,000₹617 (लगभग)₹7,400
₹4,50,000₹2,775₹33,300
₹9,00,000 (एकल, अधिकतम)₹5,550₹66,600
₹15,00,000 (संयुक्त, अधिकतम)₹9,250₹1,11,000

₹15 लाख पर पाँच साल में कुल ब्याज ₹5,55,000 होगा, और परिपक्वता पर मूल राशि वापस मिलेगी। ₹9,250 अधिकतम आंकड़ा है। कम राशि जमा करने पर कमाई उसी अनुपात में घटेगी।

हमारा विश्लेषण: आम आदमी पर क्या फर्क पड़ेगा?

नोट: यह हिस्सा हमारा विश्लेषण है, सरकारी घोषणा नहीं। इसमें दिए उदाहरण समझाने के लिए मान लिए गए आंकड़ों पर हैं, भविष्य का अनुमान नहीं।

1. दरें न बदलने का सीधा मतलब

इस तिमाही में न ब्याज बढ़ा है, न घटा है। जो लोग निवेश का मन बना रहे थे, उनके लिए कोई नई जल्दी या नया फायदा नहीं बना है। जो पहले से खाता चला रहे हैं, उनकी मासिक रकम में इस फैसले से कोई बदलाव नहीं होगा। असली खबर यही है कि स्थिरता बनी हुई है।

2. ₹9,250 पूरा हाथ में नहीं आता

ब्याज टैक्सेबल है, इसलिए असल कमाई आपके टैक्स स्लैब पर निर्भर करती है। नीचे का हिसाब 4% सेस जोड़कर मोटा अनुमान है (सरचार्ज छोड़कर)। आपका स्लैब आपकी कुल आय और टैक्स व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

आपका टैक्स स्लैबटैक्स के बाद लगभग रिटर्न₹9 लाख पर मासिक (लगभग)
टैक्स नहीं (आय छूट सीमा में)7.4%₹5,550
5%7.0%₹5,261
10%6.6%₹4,973
20%5.9%₹4,396
30%5.1%₹3,818

यानी ऊंचे स्लैब वाले व्यक्ति के लिए 7.4% का आकर्षण काफी घट जाता है। कम आय वाले परिवारों और रिटायर्ड लोगों के लिए, जिनकी कुल आय टैक्स सीमा के आसपास या नीचे है, यह योजना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।

3. "पेंशन जैसी" आय, पर महंगाई का असर नहीं जुड़ता

इस योजना में हर महीने रकम तय रहती है। यही इसकी ताकत है, और यही सीमा भी। मान लीजिए आने वाले पांच साल तक रोजमर्रा की चीजों के दाम हर साल 5% बढ़ें। तब आज के ₹9,250 की खरीद क्षमता पांच साल बाद लगभग ₹7,250 के बराबर रह जाएगी। यह सिर्फ एक काल्पनिक उदाहरण है, भविष्य की भविष्यवाणी नहीं। पर इससे समझ आता है कि ऐसी आय को अकेले खर्च चलाने का आधार बनाना जोखिम भरा हो सकता है।

सोने में निवेश का विकल्प: Gold ETF में 35% रिटर्न: निवेश कैसे करें और कितना जोखिम?

4. ₹15 लाख का आंकड़ा हर परिवार के लिए नहीं

₹9,250 वाला हिसाब संयुक्त खाते की अधिकतम सीमा पर बनता है। इसके लिए बड़ी एकमुश्त रकम चाहिए, जो रिटायरमेंट फंड या जमा पूंजी वाले परिवारों के पास ही होती है। ज्यादातर आम परिवार छोटी रकम से शुरू करेंगे, जैसे ₹1 से ₹3 लाख, जिस पर मासिक आय ₹617 से ₹1,850 के बीच बैठेगी। इसे अकेली आमदनी की जगह बैकअप आय की तरह देखना ज्यादा व्यावहारिक है।

संयुक्त निवेश और टैक्स पर और पढ़ें: जॉइंट होम लोन लेने से पहले जान लें ये बात, वरना EMI बाउंस होते ही डूब सकता है आपका भी CIBIL स्कोर

5. पैसा 5 साल के लिए बंध जाता है

पहले साल निकासी की इजाजत नहीं है, और उसके बाद निकालने पर मूलधन का एक हिस्सा कटता है। इसलिए आपातकालीन फंड (इमरजेंसी फंड) अलग से रखकर ही इसमें पैसा लगाना समझदारी होगी। जो रकम 5 साल तक जरूरी नहीं पड़ेगी, वही यहां लगाएं।

6. किसे ज्यादा फायदा, किसे सोचकर चलना चाहिए

  • ज्यादा उपयुक्त: कम टैक्स स्लैब वाले रिटायर्ड लोग, जो सुरक्षित मासिक आय चाहते हैं और जिनके पास इमरजेंसी फंड अलग है।
  • तुलना जरूर करें: 60 साल से ऊपर के लोग SCSS (8.2%) देखें, क्योंकि ब्याज दर ज्यादा है, हालांकि भुगतान तिमाही मिलता है और शर्तें अलग हैं।
  • सोचकर चलें: 30% स्लैब वाले निवेशक, जिन्हें टैक्स के बाद रिटर्न काफी घटता दिखेगा, और जिन्हें महंगाई से आगे निकलने वाला रिटर्न चाहिए।

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, निवेश या टैक्स सलाह नहीं। निवेश से पहले अपने टैक्स सलाहकार या डाकघर से नियम की पुष्टि कर लें।

जरूरी बातें

  • पात्रता: भारत के निवासी खाता खोल सकते हैं। संयुक्त खाते में अधिकतम तीन वयस्क जुड़ सकते हैं और सभी का हिस्सा बराबर माना जाता है। 10 साल से ऊपर के बच्चे अभिभावक की देखरेख में खाता खोल सकते हैं। NRI यह खाता नहीं खोल सकते।
  • आधार और PAN: खाता खोलने के लिए आधार नंबर या आधार एनरोलमेंट स्लिप जरूरी है। खबरों के मुताबिक पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं के लिए PAN भी अनिवार्य किया गया है।
  • पहले बचत खाता: MIS खोलने के लिए पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए। मासिक ब्याज इसी खाते में आता है।
  • सीमा का नियम: आपके सभी MIS खातों को मिलाकर एकल नाम पर ₹9 लाख और संयुक्त खातों में ₹15 लाख की सीमा लागू होती है।
  • समय से पहले निकासी: पहले साल में खाता बंद नहीं हो सकता। 1 से 3 साल के बीच बंद करने पर मूलधन का 2% और 3 से 5 साल के बीच 1% कटता है। उदाहरण: ₹9 लाख का खाता दो साल बाद बंद करने पर ₹18,000 कटेंगे।
  • ब्याज न निकालने पर: अगर आप किसी महीने का ब्याज नहीं निकालते, तो वह बचत खाते में पड़ा रहता है और उस पर इस योजना से अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता।
  • मैच्योरिटी पर: 5 साल बाद पूरी जमा राशि वापस मिलती है। चाहें तो इसे दोबारा इसी योजना में लगाकर मासिक आय जारी रख सकते हैं। तब उस समय की ब्याज दर लागू होगी।
  • टैक्स: ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से जुड़ता है। जमा पर धारा 80C का लाभ नहीं मिलता। इस ब्याज पर TDS नहीं कटता, पर आयकर रिटर्न में इसे दिखाना होगा।

आगे क्या?

अगली समीक्षा दिसंबर 2026 के अंत में होगी, जो जनवरी-मार्च 2027 तिमाही पर लागू होगी। उसमें दर क्या होगी, यह जानकारी उपलब्ध नहीं है। सरकार ने छोटी बचत दरों में आखिरी बदलाव 2023-24 की चौथी तिमाही में किया था। फिर भी आगे की दर का कोई निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

FAQ

1. क्या सबको ₹9,250 मासिक मिलेगा?

नहीं। यह ₹15 लाख के संयुक्त खाते की अधिकतम कमाई है। ₹9 लाख के एकल खाते में ₹5,550 मिलेंगे।

2. खाता खोलने के लिए क्या चाहिए?

पोस्ट ऑफिस का बचत खाता, आधार (या एनरोलमेंट स्लिप) और PAN। साथ में पहचान, पते के दस्तावेज और फोटो लगते हैं। सटीक सूची डाकघर से पुष्टि कर लें।

3. अगर मैं मासिक ब्याज नहीं निकालूं तो?

ब्याज बचत खाते में पड़ा रहेगा और उस पर MIS से अलग ब्याज नहीं मिलेगा। इसलिए नियमित आमदनी चाहने वालों को हर महीने ब्याज निकाल लेना चाहिए।

4. क्या ब्याज पर टैक्स लगता है?

हाँ, ब्याज आपकी आय में जुड़कर स्लैब के अनुसार टैक्सेबल है। TDS नहीं कटता, पर रिटर्न में दिखाना जरूरी है।

5. क्या 5 साल से पहले पैसा निकाल सकते हैं?

पहले साल में नहीं। उसके बाद निकासी पर 2% या 1% की कटौती होती है, जैसा ऊपर बताया गया है।

6. 5 साल बाद पैसे का क्या होगा?

पूरी जमा राशि वापस मिलेगी। चाहें तो उसे दोबारा इसी योजना में लगा सकते हैं।


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसे निवेश, कर (टैक्स) या वित्तीय सलाह न समझें। ब्याज दरें, निवेश सीमा और नियम सरकार व डाक विभाग द्वारा समय-समय पर बदले जा सकते हैं। लेख में दिए गए हिसाब और उदाहरण समझाने के लिए हैं, इसलिए वास्तविक रकम अलग हो सकती है। कोई भी निवेश करने से पहले इंडिया पोस्ट की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी डाकघर या योग्य वित्तीय/टैक्स सलाहकार से ताजा जानकारी की पुष्टि जरूर कर लें। इस लेख के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ