PM सुरक्षा बीमा योजना: सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख तक का एक्सीडेंट कवर
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) एक सरकारी दुर्घटना बीमा स्कीम है, जो बेहद कम प्रीमियम में एक्सीडेंट की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देती है। सिर्फ ₹20 सालाना प्रीमियम में यह योजना दुर्घटना में मृत्यु या विकलांगता होने पर परिवार को आर्थिक सहारा देती है।
योजना क्या है और कितना कवर मिलता है?
यह 1 साल की अवधि वाली पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस स्कीम है, जिसे हर साल रिन्यू कराया जाता है। बीमा खरीदने के लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं होती।
| स्थिति | क्लेम राशि |
|---|---|
| दुर्घटना में मृत्यु होने पर | ₹2 लाख |
| दोनों आंखों की रोशनी जाने या दोनों हाथ/पैर खराब होने पर | ₹2 लाख |
| एक आंख की रोशनी जाने या एक हाथ/पैर खराब होने पर | ₹1 लाख |
'दुर्घटना' किसे माना जाता है?
योजना में दुर्घटना का मतलब किसी अचानक, अप्रत्याशित और बाहरी कारण से हुई घटना से है।
- प्राकृतिक आपदाएं: भूकंप, बाढ़ जैसी घटनाओं से हुई मृत्यु या विकलांगता पर क्लेम मिलता है।
- हत्या: मर्डर के मामलों में भी बीमा कवर लागू होता है।
- आत्महत्या: इसमें कोई बीमा लाभ नहीं दिया जाता।
कौन जुड़ सकता है — पात्रता और उम्र सीमा
- बैंक या पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट रखने वाले 18 से 70 साल के व्यक्ति इसके लिए पात्र हैं।
- अगर किसी के एक से ज़्यादा बैंकों में खाते हैं, तो वह सिर्फ एक ही खाते से इस योजना में शामिल हो सकता है।
- जॉइंट अकाउंट होने पर हर खाताधारक अपना अलग ₹20 प्रीमियम देकर अलग से इस योजना का फायदा ले सकता है।
प्रीमियम और कवर की अवधि
प्रीमियम की रकम बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते से ऑटो-डेबिट के ज़रिए साल में एक बार कटती है। बीमा अवधि हर साल 1 जून से 31 मई तक चलती है। जो लोग शुरुआत में शामिल नहीं हो पाते, वे बाद में भी सालाना प्रीमियम देकर जुड़ सकते हैं — हालांकि रिस्क कवर उसी दिन से शुरू होगा जिस दिन प्रीमियम कटा है, पहले से नहीं।
कवर कब खत्म या रद्द हो सकता है
- खाताधारक की उम्र 70 साल पूरी होने पर।
- बैंक/पोस्ट ऑफिस खाता बंद होने पर, या प्रीमियम कटने के लिए खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने पर।
- अगर गलती से एक से ज़्यादा खातों से प्रीमियम कट जाए, तो कवर सिर्फ एक खाते पर ही लागू रहेगा; बाकी प्रीमियम वापस नहीं मिलता।
क्लेम प्रोसेस — किसे और कैसे मिलता है पैसा
- इस योजना में अस्पताल में भर्ती होने के इलाज़ के खर्च का भुगतान नहीं होता — यह सिर्फ मृत्यु और स्थायी विकलांगता पर लागू होती है।
- मृत्यु होने पर: क्लेम राशि नॉमिनी या कानूनी वारिस के बैंक खाते में भेजी जाती है।
- विकलांगता होने पर: राशि सीधे बीमित व्यक्ति के अपने बैंक खाते में जमा होती है।
- सड़क, रेल या वाहन दुर्घटना, डूबने या किसी आपराधिक घटना से जुड़ी मृत्यु में पुलिस रिपोर्ट/FIR ज़रूरी होती है। सांप काटने या पेड़ से गिरने जैसे मामलों में अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर भी क्लेम प्रोसेस हो सकता है।
योजना का लाभ कहां से लें?
यह योजना बीमा कंपनियों के ज़रिए ऑफर की जाती है, और इसका फायदा आप उस बैंक की किसी भी शाखा से ले सकते हैं जहां आपका खाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या NRI इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
भारत में किसी बैंक में खाता रखने वाले NRI भी इस योजना से जुड़ सकते हैं, बशर्ते प्रीमियम का भुगतान उनके भारतीय बैंक खाते से हो।
2. एक बार योजना छोड़ने के बाद क्या दोबारा जुड़ा जा सकता है?
हां, अगर किसी वजह से कवर बंद हो जाता है (जैसे बैलेंस कम होने पर), तो पात्रता की शर्तें पूरी करने पर आगे के वर्षों में दोबारा प्रीमियम देकर जुड़ा जा सकता है।
3. क्या इस योजना में हेल्थ चेकअप या मेडिकल टेस्ट देना पड़ता है?
नहीं, इस स्कीम में शामिल होने के लिए किसी मेडिकल जांच की ज़रूरत नहीं होती।
4. यह योजना हेल्थ इंश्योरेंस से कैसे अलग है?
यह सिर्फ दुर्घटना (एक्सीडेंट) से जुड़ी मृत्यु या स्थायी विकलांगता को कवर करती है — बीमारी के इलाज या अस्पताल में भर्ती होने का खर्च इसमें शामिल नहीं है।

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