ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका: बोले—'इसमें अमेरिका का फायदा'; 8 दिन पहले खुद रूस से की थी डीजल डील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस और ईरान से तेल व गैस आयात करने वाले देशों पर 100% तक भारी आयात शुल्क लगाने वाले कड़े कानून को प्रभावी होने से ठीक पहले रोक दिया है। संसद को भेजे आधिकारिक संदेश में ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि इस कानून से छूट जारी रखना वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रीय और आर्थिक हित में बेहद आवश्यक है।
यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में खासा चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इसके महज आठ दिन पहले अमेरिका ने घरेलू ईंधन किल्लत से निपटने के लिए खुद रूस से भारी मात्रा में डीजल खरीदने का आपातकालीन समझौता किया था। इससे पूर्व वाशिंगटन लगातार भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने पर कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहा था।
घटनाक्रम के मुख्य बिंदु
- कानून पर मिली आधिकारिक छूट: ट्रम्प ने लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026 के अंतर्गत तय 100% दंडात्मक टैरिफ पर औपचारिक वेवर जारी किया।
- अमेरिका में डीजल का रिकॉर्ड संकट: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अमेरिका में डीजल के दाम उछलकर 6.28 डॉलर प्रति गैलन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए।
- रूस से आपातकालीन खरीद: घरेलू आपूर्ति सुचारू रखने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने रूस से 30 लाख टन डीजल आपूर्ति का समझौता तय किया।
- भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत: टैरिफ टलने से भारत के फार्मास्यूटिकल, आईटी, टेक्सटाइल और ऑटो-कंपोनेंट निर्यात पर मंडराता संकट पूरी तरह टल गया।
घरेलू राजनीतिक दबाव और कूटनीतिक यू-टर्न
आगामी अमेरिकी चुनावों से पहले बेलगाम होती महंगाई और ईंधन संकट पर काबू पाना ट्रम्प प्रशासन के लिए सबसे बड़ी घरेलू चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर 100% आयात शुल्क लागू कर दिया जाता, तो वैश्विक रिफाइनरी तंत्र ठप हो जाता और अमेरिका में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बेकाबू हो जातीं। यही कारण है कि सख्त बयानों के बावजूद अमेरिका को व्यावहारिक रुख अपनाते हुए प्रतिबंधों को स्थगित करना पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 100% टैरिफ क्यों नहीं लगाया?
ट्रम्प प्रशासन ने स्वीकार किया कि इस शुल्क से छूट जारी रखना स्वयं अमेरिकी अर्थव्यवस्था के हित में है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखा जा सके।
2. अमेरिका को खुद रूस से डीजल क्यों खरीदना पड़ा?
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण अमेरिका में डीजल की कीमतें 3.70 डॉलर से उछलकर रिकॉर्ड 6.28 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई थीं, जिसे सामान्य करने के लिए यह आपातकालीन समझौता करना पड़ा।
3. इस फैसले का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारतीय निर्यातकों के ऊपर से भारी दंडात्मक शुल्क का खतरा समाप्त हो गया है। साथ ही, दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, रक्षा और डेटा सेंटर जैसे अहम क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

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