साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 32 रन से हराया, सीरीज़ पर 2-0 की बढ़त
जोहानिसबर्ग के डीपी वर्ल्ड वांडरर्स स्टेडियम में रविवार को खेले गए दूसरे वनडे में साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 32 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह मुकाबला "पिंक डे" के रूप में खेला गया, जो हर साल ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता के लिए आयोजित होता है — इस बार हर खिलाड़ी की जर्सी पर उनके नाम की जगह किसी योद्धा या इस बीमारी से लड़ चुके व्यक्ति का नाम लिखा था। डेविड मिलर की जर्सी पर उनकी मां जेनी का नाम था, और उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी पारी खेलकर इस पल को यादगार बना दिया।
मैच की कहानी
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत बेहद खराब रही — कप्तान एडेन मार्करम पारी की पहली ही गेंद पर आउट हो गए, और क्विंटन डी कॉक भी सिर्फ 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। एक समय टीम 93/3 पर संघर्ष कर रही थी, तभी तेम्बा बावुमा और डेविड मिलर की जोड़ी ने पारी को थाम लिया।
दोनों ने चौथे विकेट के लिए 156 रन की साझेदारी की। बावुमा ने संयमित अंदाज़ में 116 गेंदों पर 103 रन बनाए, जबकि मिलर ने महज 93 गेंदों पर 142 रन ठोक डाले — जिसमें 12 चौके और 9 छक्के शामिल थे। इसी विस्फोटक पारी की बदौलत साउथ अफ्रीका 365/9 के विशाल स्कोर तक पहुंचा।
जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने भी शानदार लड़ाई लड़ी। मिचेल मार्श और ट्रैविस हेड ने 84-84 रन बनाए, लेकिन जैक एडवर्ड्स की पांच विकेट लेने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई पारी 333 रन पर सिमट गई — जीत के लिए 33 रन कम।
मेरी नज़र से
यह मैच सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं थी, बल्कि साउथ अफ्रीकी वनडे टीम की परिपक्वता का सबूत भी था। 93/3 से 365/9 तक का सफर बताता है कि टीम अब शुरुआती झटकों से घबराती नहीं — बल्कि बावुमा जैसे स्थिर कप्तान और मिलर जैसे अनुभवी फिनिशर की मौजूदगी टीम को हर हाल में संभालने का हौसला देती है।
डेविड मिलर की पारी खास तौर पर ध्यान खींचती है। लगभग 37 साल की उम्र में भी उनकी बल्लेबाज़ी में वह पुरानी धार बरकरार है — स्पिन के खिलाफ आक्रामकता और डेथ ओवरों में तेज़ी से रन बटोरने की काबिलियत आज भी बेजोड़ है। यह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका चौथा वनडे शतक होना बताता है कि यह टीम विशेष रूप से उनके लिए "पसंदीदा प्रतिद्वंद्वी" बन चुकी है।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के लिए यह हार चिंता का विषय होनी चाहिए। स्पिन के खिलाफ उनकी कमज़ोरी एक बार फिर उजागर हुई — मार्करम और मिलर ने मिलकर ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों के 17 ओवरों में 133 रन बटोरे, वो भी बिना कोई विकेट गंवाए। यह आगामी विश्व कप की तैयारियों के लिहाज़ से ऑस्ट्रेलियाई थिंक-टैंक के लिए एक बड़ा सवाल है।
कुल मिलाकर, साउथ अफ्रीका की यह जीत उनके घरेलू मैदान पर बल्लेबाज़ी की गहराई और आत्मविश्वास को दर्शाती है, जबकि 30 सितंबर को होने वाला अंतिम मुकाबला अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है — असली परीक्षा तो विश्व कप की तैयारियों में आगे होगी।

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