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NSE IPO Listing Today: GMP गिरा, निवेशकों का भरोसा बरकरार

NSE IPO: GMP में भारी गिरावट, फिर भी बड़े निवेशकों का भरोसा बरकरार

24 सितंबर 2026

आज हो रही है ऐतिहासिक लिस्टिंग

लंबे इंतज़ार के बाद आज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) खुद शेयर बाजार में उतर गया है। इसके शेयर BSE के साथ-साथ Metropolitan Stock Exchange of India (MSEI) पर भी ट्रेड होना शुरू हो गए हैं। इस लिस्टिंग के साथ NSE, BSE के बाद देश का दूसरा लिस्टेड स्टॉक एक्सचेंज बन गया है।

एक दिलचस्प बात यह भी है कि खुद NSE के MD और CEO आशीष चौहान ने पहले ही साफ कर दिया था कि एक्सचेंज अपने शेयर खुद के ही ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर चलाने की मंज़ूरी नहीं मांगेगा, क्योंकि मौजूदा नियम इसकी इजाज़त नहीं देते — कोई भी मान्यता प्राप्त एक्सचेंज अपनी सिक्योरिटीज़ अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं कर सकता।

GMP में तेज़ गिरावट, सबसे बड़ी चर्चा की वजह

अनलिस्टेड मार्केट में अब ग्रे मार्केट प्रीमियम घटकर करीब ₹83 प्रति शेयर रह गया है, यानी ₹1,785 के इश्यू प्राइस से करीब 4.8% ऊपर (कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा और भी कम, करीब 2.4% बताया गया)। जबकि शुरुआती दिनों में यही प्रीमियम ₹250-310 यानी 14-17% तक ऊंचा चल रहा था।

इतनी तेज़ गिरावट से साफ संकेत मिलता है कि निवेशक अब लिस्टिंग पर बहुत मामूली मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशक लंबे समय से इस लिस्टिंग का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन भारी इश्यू साइज़ और बाज़ार में शेयरों की ज़्यादा उपलब्धता की वजह से अब उत्साह कुछ कम हो गया है।

वैल्यूएशन को लेकर उठ रहे सवाल

अपर प्राइस बैंड ₹1,785 पर NSE की मार्केट वैल्यू करीब ₹4.42 लाख करोड़ आंकी गई है, जबकि इसके प्रतिद्वंद्वी BSE की मौजूदा वैल्यूएशन सिर्फ ₹1.33 लाख करोड़ के आसपास है। यानी NSE का वैल्यूएशन BSE से करीब तीन गुना ज़्यादा है। मार्केट जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में सप्लाई और डिमांड का यही संतुलन तय करेगा कि शुरुआती ट्रेडिंग सेशंस में शेयर कैसा प्रदर्शन करता है।

इश्यू का पूरा गणित

NSE ने इस महीने की शुरुआत में अपना IPO लॉन्च किया था, जिसके ज़रिए मौजूदा शेयरधारकों की 12.64 करोड़ शेयरों की बिक्री से ₹22,562 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। चूंकि पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) था, इसलिए NSE को खुद कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी — पूरी रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगी।

प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 के बीच तय हुआ था। 8 शेयरों के लॉट साइज़ के साथ रिटेल निवेशकों को आवेदन के लिए कम से कम ₹14,280 का निवेश करना ज़रूरी था।

एंकर निवेशकों की भारी दिलचस्पी

IPO खुलने से पहले NSE ने 150 से ज़्यादा एंकर निवेशकों से ₹6,746 करोड़ जुटाए थे। इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का हिस्सा ₹2,883 करोड़ यानी 43% रहा। एंकर राउंड में 20 से ज़्यादा बड़े विदेशी लॉन्ग-ओनली फंड्स ने हिस्सा लिया, जिनमें सिंगापुर की सॉवरेन वेल्थ फंड GIC, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और नॉर्वे की Norges Bank जैसे बड़े नाम शामिल थे।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की भागीदारी भी उतनी ही व्यापक रही — 25 से ज़्यादा म्यूचुअल फंड्स के साथ-साथ 11 इंश्योरेंस और पेंशन कंपनियों ने मिलकर करीब ₹3,588 करोड़ का निवेश किया, जो कुल एंकर बुक का 53% हिस्सा है।

LIC और SBI की खास भूमिका

NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी LIC, जिसकी करीब 10.72% हिस्सेदारी है, उसने भी एंकर राउंड में हिस्सा लिया। LIC, LIC म्यूचुअल फंड और LIC पेंशन फंड ने मिलकर ₹500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया — यह तब है जब NSE में LIC की मौजूदा हिस्सेदारी पहले से ही IPO में बेचे जा रहे हिस्से से ज़्यादा है।

SBI ग्रुप भी इस राउंड में पीछे नहीं रहा — SBI म्यूचुअल फंड, SBI जनरल, SBI लाइफ और SBI पेंशन फंड ने मिलकर हिस्सा लिया। दिलचस्प बात यह है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और SBI कैपिटल मार्केट्स मिलकर NSE में अपनी 1% हिस्सेदारी बेच भी रहे हैं, जबकि ग्रुप का कुल निवेश विभिन्न इकाइयों के ज़रिए ₹400 करोड़ से ज़्यादा है।

सब्सक्रिप्शन का पूरा हाल

17 से 21 सितंबर के बीच तीन दिन चली बोली प्रक्रिया में NSE के पहले पब्लिक इश्यू को ज़बरदस्त मांग मिली और यह करीब छह गुना भर गया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने मांग की अगुवाई की और अपने रिज़र्व हिस्से को करीब 13 गुना भर दिया, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 1.4 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) का हिस्सा 6.6 गुना भरा।

निवेशकों में मिली-जुली राय

आम निवेशकों के बीच भी इस लिस्टिंग को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोगों को डर है कि कहीं यह हाइप भी उस चर्चित IPO जैसी साबित न हो जाए, जिसका शेयर प्राइस लिस्टिंग के पांच साल बाद भी अपने इश्यू प्राइस से काफी नीचे बना हुआ है।

निष्कर्ष

GMP में भारी गिरावट के बावजूद बड़े संस्थागत और विदेशी निवेशकों का भरोसा NSE पर मज़बूत बना हुआ है। हालांकि आम रिटेल निवेशकों का उत्साह उतना नहीं दिखा जितनी शुरुआत में उम्मीद थी। अब सबकी नज़र इस पर है कि शुरुआती ट्रेडिंग सेशंस में शेयर किस दिशा में जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले अपनी रिसर्च करें या SEBI रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह ज़रूर लें।

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