सेंसेक्स 813 अंक गिरा, निफ्टी 23,431 पर बंद — जानें बाजार में गिरावट की 6 बड़ी वजहें

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट
बाजार विश्लेषण

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 813 अंक टूटा, निवेशकों की चिंता बढ़ी

9 सितंबर 2026  |  मुंबई  |  बिज़नेस डेस्क

भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन एक बार फिर निराशाजनक साबित हुआ। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव हावी रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक गहरे लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 813.35 अंकों यानी 1.08 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,764.23 के स्तर पर आ टिका, जबकि एनएसई निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत लुढ़ककर 23,431.50 पर बंद हुआ। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता को और गहरा कर दिया है, क्योंकि यह गिरावट का सिलसिला अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है।

सेंसेक्स
74,764.23
▼ 813.35 (1.08%)
निफ्टी
23,431.50
▼ 203.60 (0.86%)
रुपया / डॉलर
94.95
▼ 21 पैसे

बाजार क्यों गिरा? — गिरावट की मुख्य वजहें

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट को कई मोर्चों से मिले नकारात्मक संकेतों का नतीजा माना जा रहा है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। तेल आयात पर निर्भर भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कई कारक बाजार पर दबाव बना रहे हैं।

वजह बाजार पर असर
ईरान–अमेरिका तनाव वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, निवेशकों में डर का माहौल
कच्चा तेल 100 डॉलर पार महंगाई और चालू खाता घाटे की चिंता बढ़ी
नए IPO की भरमार द्वितीयक बाजार से पैसा IPO में शिफ्ट, तरलता की कमी
आईटी शेयरों में बिकवाली निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.24% टूटा
रुपये की कमजोरी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 94.95 पर
FII की लगातार बिकवाली विदेशी निवेशकों की धारणा कमजोर, बाजार पर दबाव

आईटी और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

इस गिरावट में सबसे ज्यादा मार आईटी सेक्टर पर पड़ी। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.24 प्रतिशत तक टूट गया, जो सभी सेक्टोरल सूचकांकों में सबसे बड़ी गिरावट रही। बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव कायम रहा, जिससे व्यापक बाजार में कमजोरी और गहरी हो गई। हालांकि इस उथल-पुथल भरे माहौल में भी कुछ शेयरों ने सकारात्मक दायरे में मजबूती दिखाई, जिससे पूरी तरह एकतरफा गिरावट नहीं रही।

मार्केट ब्रेडथ भी रही कमजोर

बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेडथ) भी बिकवाली के दबाव को साफ दर्शाती है। कारोबार के दौरान कुल 1,805 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 2,382 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और 173 शेयरों के भाव में कोई खास बदलाव नहीं आया। यानी बिकवाली सिर्फ बड़े सूचकांकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी इसका असर देखा गया। स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों में भी क्रमशः 0.4 और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय कई वैश्विक और घरेलू दबावों के बीच फंसा हुआ नजर आ रहा है। भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, आईटी सेक्टर की कमजोर सेंटीमेंट और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली — इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार को दबाव में रखा है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है और ऐसे दौर पहले भी आते-जाते रहे हैं, लेकिन अगर आने वाले दिनों में भी ईरान-अमेरिका तनाव नहीं थमता और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए वैश्विक घटनाक्रमों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है और बाजार के आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया एक प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी निवेश से होने वाले लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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