कारोबार | 28 सितंबर 2026
त्योहार से पहले महंगाई की मार, 1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV और फ्रिज
इस साल तीन बार में करीब 23% बढ़ चुके हैं दाम; कॉपर, एल्युमिनियम और क्रूड ऑयल की महंगाई का असर
नई दिल्ली. दिवाली से पहले घरेलू उपकरण खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। देश की प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां 1 अक्टूबर से एसी, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर जैसे उत्पादों की कीमतें 5 से 8 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी अकेली नहीं है। इस साल अब तक तीन बार में इन उत्पादों के दाम कुल मिलाकर करीब 23 फीसदी चढ़ चुके हैं। यानी जो सामान साल की शुरुआत में एक तय बजट में आ जाता था, वह अब काफी महंगा हो चुका है।
किसके कितने दाम बढ़ेंगे
जानकारों के मुताबिक एयर कंडीशनर की कीमतों में सबसे ज्यादा, यानी तत्काल 5 से 8 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। वहीं कई निर्माता वॉशिंग मशीन, फ्रिज और एलईडी टीवी के दाम 3 से 4 फीसदी तक बढ़ाने जा रहे हैं। यह भी साफ है कि सभी कंपनियां एक साथ और एक ही अनुपात में दाम नहीं बढ़ाएंगी। कुछ कंपनियां अलग-अलग उत्पादों की कीमतें पहले ही बढ़ा चुकी हैं, जबकि कुछ अब भी बढ़ी हुई लागत का आकलन कर रही हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अलग-अलग श्रेणियों में बढ़ोतरी का असर 5 से 7 फीसदी के आसपास रह सकता है और इसका समय ब्रांड के हिसाब से आगे-पीछे हो सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम
इस महंगाई की सबसे बड़ी वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार तांबा, स्टील, एल्युमिनियम और कच्चे तेल से जुड़े उत्पाद महंगे हुए हैं। इन चारों का इस्तेमाल घरेलू उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है।
एसी और फ्रिज में तांबे की पाइपिंग और एल्युमिनियम के पुर्जे कूलिंग सिस्टम की रीढ़ होते हैं। स्टील का इस्तेमाल बॉडी, ढांचे और वॉशिंग मशीन के ड्रम जैसे हिस्सों में होता है। कच्चा तेल महंगा होने का असर प्लास्टिक के पुर्जों और पैकेजिंग की लागत पर पड़ता है। यानी एक भी धातु या कमोडिटी का दाम चढ़ता है, तो उसका असर तैयार उत्पाद पर दिखता है।
इसके अलावा डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव भी कंपनियों की परेशानी बढ़ा रहा है। कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और कच्चा माल आयात होते हैं, इसलिए रुपया कमजोर होने पर आयात महंगा पड़ता है। ऊपर से माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से फैक्ट्री से दुकान तक सामान पहुंचाना भी महंगा हो गया है। इन सबके मिले-जुले दबाव में कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।
एसी पर सबसे ज्यादा असर क्यों
एयर कंडीशनर बाकी उपकरणों के मुकाबले तांबे और एल्युमिनियम पर ज्यादा निर्भर है। कंप्रेसर, कंडेंसर और इवैपोरेटर जैसे मुख्य हिस्सों में इन्हीं धातुओं का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि धातुओं के भाव चढ़ने पर सबसे पहले और सबसे ज्यादा असर एसी की कीमतों पर दिखता है। टीवी में लागत का बड़ा हिस्सा पैनल और चिप जैसे कंपोनेंट का होता है, इसलिए वहां बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।
ग्राहकों को कितनी राहत
राहत की बात यह है कि बाजार में अभी पुराना स्टॉक मौजूद है। त्योहारी सीजन में दुकानदारों और डीलरों के पास पहले से मंगाया हुआ माल होता है, जो पुरानी कीमत पर ही बिकता रहता है। इसलिए जानकारों का मानना है कि ग्राहकों को कुछ समय तक पूरी बढ़ोतरी महसूस नहीं होगी। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा और नया माल नई कीमत पर आएगा, दुकानों पर बढ़े हुए दाम दिखने लगेंगे। सबसे ज्यादा मांग वाले मॉडल सबसे पहले खत्म होते हैं, इसलिए पसंदीदा मॉडल के लिए इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: कौन-कौन से उपकरण महंगे होंगे?
उत्तर: एयर कंडीशनर, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर के साथ कुछ अन्य घरेलू उपकरणों की कीमतें बढ़ने की तैयारी है।
प्रश्न: कितने दाम बढ़ेंगे?
उत्तर: एसी के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। फ्रिज, वॉशिंग मशीन और एलईडी टीवी के दाम में 3 से 4 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।
प्रश्न: बढ़े हुए दाम कब से लागू होंगे?
उत्तर: कई कंपनियां 1 अक्टूबर से कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। हालांकि यह ब्रांड पर निर्भर करता है। कुछ ने पहले ही दाम बढ़ा दिए हैं और कुछ अभी लागत का आकलन कर रही हैं।
प्रश्न: दाम बढ़ने की वजह क्या है?
उत्तर: तांबा, स्टील, एल्युमिनियम और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की महंगाई, डॉलर में उतार-चढ़ाव और माल ढुलाई का बढ़ा खर्च मुख्य वजह हैं।
प्रश्न: क्या पुराने स्टॉक पर पुरानी कीमत मिलेगी?
उत्तर: त्योहारी सीजन में दुकानों के पास पुराना स्टॉक होता है, इसलिए कुछ समय तक पुरानी कीमत पर सामान मिल सकता है। पर यह हर दुकान और मॉडल पर अलग होगा और स्टॉक खत्म होते ही नए दाम लागू हो जाएंगे।
प्रश्न: क्या अभी खरीदना चाहिए या इंतजार करना चाहिए?
उत्तर: अगर आपको जरूरत है और बजट तय है, तो बढ़ोतरी लागू होने से पहले खरीदारी फायदेमंद हो सकती है। जरूरत टालने लायक हो तो ऑफर और सेल की तुलना करके फैसला लें।
आगे क्या
आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा काफी हद तक कमोडिटी बाजार पर निर्भर करेगी। अगर तांबा, एल्युमिनियम और कच्चे तेल के भाव नरम पड़ते हैं और रुपये में स्थिरता आती है, तो कंपनियों पर दबाव घट सकता है। लेकिन फिलहाल हालात ऐसे नहीं दिख रहे कि त्योहारी सीजन में कीमतें नीचे आएं। कंपनियों के लिए भी यह संतुलन साधने का समय है। दाम बढ़ाने से उनका मार्जिन बचता है, पर दिवाली के मौसम में बिक्री का बड़ा हिस्सा दांव पर होता है। ऐसे में कई ब्रांड डिस्काउंट, कैशबैक और आसान किस्तों जैसे ऑफर के जरिये ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, कच्चे माल की महंगाई अब सीधे घर के सामान की कीमतों में दिखने लगी है। ग्राहकों के लिए सबसे अच्छा रास्ता यही है कि अपनी जरूरत और बजट तय करें, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करें और सही समय पर सोच-समझकर खरीदारी करें।

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