OPS vs NPS vs UPS: सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने से साफ इनकार, जानें तीनों स्कीम में पूरा अंतर
क्या आपकी पेंशन को लेकर भी सवाल हैं? सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली को लेकर लंबे समय से मांग उठ रही थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल इसे लागू करने का कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही 5 राज्यों की एक बड़ी मांग को भी खारिज कर दिया गया है। आइए जानते हैं पूरा मामला और साथ ही समझते हैं कि OPS, NPS और UPS में आखिर फर्क क्या है।
सरकार ने संसद में क्या कहा?
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने को लेकर सरकार का रुख पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि OPS को वापस लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को मुख्य वजह बताया है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में वापस जाने के बारे में केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) को सूचित किया था।
5 राज्यों की फंड वापसी की मांग खारिज
- इन राज्यों ने NPS में जमा फंड को वापस करने की मांग की थी
- सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया है
- वजह: जमा कॉर्पस राज्य सरकारों को रिफंड नहीं हो सकता
कैग रिपोर्ट और राज्यों का अधिकार
एक अन्य सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि राज्यों में OPS की बहाली पूरी तरह से राज्य की नीतिगत विवेकाधिकार का मामला है। हालांकि, कैग (CAG) ने अपनी हालिया 'स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट्स' में राज्यों द्वारा OPS में वापस लौटने के वित्तीय परिणामों और नुकसान को रेखांकित किया है।
2004 से लागू है NPS, अब आया UPS का ऑप्शन
NPS की शुरुआत
NPS एक डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-बेस्ड स्कीम है, जो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी।
सुधार के लिए कमेटी और UPS की शुरुआत
NPS के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन लाभ में सुधार के उद्देश्य से तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी के सुझावों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर 1 अप्रैल 2025 से 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) को लागू किया जा चुका है।
UPS की खासियत यह है कि इसका उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद कम से कम ₹10,000 प्रति माह की न्यूनतम एश्योर्ड पे-आउट और महंगाई से जुड़ी निश्चित पेंशन लाभ देना है। यह एक फंड-बेस्ड पे-आउट सिस्टम है जो कर्मचारी और सरकार दोनों के नियमित योगदान और निवेश पर निर्भर करता है।
OPS, NPS और UPS में मुख्य अंतर
तीनों पेंशन योजनाओं को समझना थोड़ा जटिल लग सकता है, लेकिन नीचे दी गई टेबल से आप आसानी से फर्क समझ सकते हैं:
| अंतर का आधार | ओल्ड पेंशन स्कीम | नेशनल पेंशन सिस्टम | यूनिफाइड पेंशन स्कीम |
|---|---|---|---|
| कर्मचारी का कंट्रीब्यूशन | 0% (सैलरी से कुछ नहीं कटता) | 10% (मूल वेतन + DA) | 10% (मूल वेतन + DA) |
| सरकार का अंशदान | कोई तय हिस्सा नहीं (पूरी पेंशन सरकार देती है) | 14% | 18.5% |
| एश्योर्ड रिटर्न | 100% गारंटी (आखिरी सैलरी का 50%) | कोई गारंटी नहीं (मार्केट पर निर्भर) | 100% गारंटी (पिछले 12 माह के औसत वेतन का 50%) |
| न्यूनतम पेंशन गारंटी | लागू नहीं | लागू नहीं | ₹10,000/माह (न्यूनतम 10 साल नौकरी पर) |
| महंगाई भत्ता (DA) | हां | नहीं | हां |
| फंड रिफंड नियम | लागू नहीं | सिर्फ विड्रॉल नियम लागू | फंड आधारित सिस्टम |
| फंड मैनेजमेंट | सरकारी खजाने से सीधे भुगतान | PFRDA रजिस्टर्ड फंड मैनेजर | सरकार द्वारा बनाए गए विशेष पेंशन फंड |
AUM और फिस्कल डेफिसिट क्या होता है?
पेंशन को लेकर चल रही इस बहस में दो शब्द बार-बार सामने आते हैं — AUM और राजकोषीय घाटा। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं:
- एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): इसका मतलब उस रकम से है, जिसे कोई वित्तीय संस्थान (जैसे PFRDA) निवेशकों या कर्मचारियों की तरफ से मैनेज करता है।
- राजकोषीय घाटा: सरकार की कुल कमाई और उसके कुल खर्च के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा है। सरकार का खर्च उसकी आमदनी से ज्यादा होता है, तो उसे इस घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेना पड़ता है।
राजकोषीय घाटा घटकर 4.4% पर आया
| वित्त वर्ष | राजकोषीय घाटा |
|---|---|
| 2021-22 | 6.7% |
| 2025-26 | 4.4% |
| 2026-27 (बजट अनुमान) | 4.3% (₹16,95,768 करोड़) |
OPS की जगह UPS क्यों बेहतर विकल्प माना जा रहा है?
सरकार का तर्क है कि पूरी तरह OPS लागू करना खजाने पर भारी बोझ डाल सकता है, क्योंकि इसमें सरकार को पूरी पेंशन खुद वहन करनी पड़ती है और कोई निश्चित फंडिंग सिस्टम नहीं होता। वहीं UPS एक संतुलित विकल्प है — इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान देते हैं, फिर भी न्यूनतम पेंशन और महंगाई भत्ते की गारंटी मिलती है। यही वजह है कि सरकार OPS की जगह UPS को बढ़ावा दे रही है।
निष्कर्ष
सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल OPS की वापसी की कोई योजना नहीं है, और राज्यों की फंड वापसी की मांग भी खारिज कर दी गई है। इसके बजाय सरकार UPS को बेहतर और संतुलित विकल्प बताकर आगे बढ़ा रही है, जिसमें न्यूनतम पेंशन गारंटी और महंगाई भत्ते जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कर्मचारियों के लिए यह जरूरी है कि वे तीनों स्कीम के अंतर को अच्छी तरह समझें, ताकि रिटायरमेंट प्लानिंग सही दिशा में हो सके।
FAQs
1. क्या सरकार OPS को वापस लागू करेगी?
नहीं, सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि फिलहाल OPS को वापस लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
2. किन राज्यों ने NPS फंड वापसी की मांग की थी?
राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने यह मांग की थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया।
3. UPS कब से लागू हुई?
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 1 अप्रैल 2025 से लागू की जा चुकी है।
4. UPS में न्यूनतम पेंशन कितनी मिलती है?
कम से कम 10 साल की नौकरी पूरी करने पर ₹10,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन गारंटी मिलती है।
5. NPS और UPS में सरकार का योगदान कितना है?
NPS में सरकार 14% योगदान देती है, जबकि UPS में यह बढ़कर 18.5% हो जाता है।

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